इस सस्थान की स्थापना जापानी सस्था ने कुष्ठ रोग के उन्मूलन के लिए रोग का निदान एव उपचार करने के उद्देश्य से की थी, लेकिन वर्ष 1976 मे भारत सरकार एव आई.सी.एम.आर. के अधीन आने पर इसके मूल उद्देश्यो मे कुष्ठ रोग के निदान, उपचार के साथ-साथ इस रोग पर गभीर शोध कार्य, कुष्ठ रोग प्रबन्धन की मानक तकनीकियाॅ तय करते हुए राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम मे अपना योगदान देना रहा है। वर्तमान मे इस सस्थान के कार्यक्षेत्र मे पुनः विस्तार करते हुये इसमे कुष्ठ रोग के क्षेत्र मे योगदान के अरितिक्त क्षय रोग, एचआईवी एवम् फाइलेरियासिस को भी शामिल कर लिया गया है।
कुष्ठ रोग
- इलेक्ट्रोफिजियोलोजीकल, इम्यूनोलोजीकल, माॅलीक्यूलर एव इलेक्ट्रोन-माइक्रोस्कोपिक विधियो के द्वारा कुष्ठ रोग की प्रकियायो कोे बेहतर समझना
- कुष्ठ रोग के निदान के लिए इम्यूनोलोजीकल, माॅलीक्यूलर एव इनसीटू तकनीकियाॅ विकसित करना
- औषधि प्रतिरोधकता के लिए फुटपैड, एटीपी, माॅलीक्यूलर विधियो द्वारा जीवनक्षमता तय करना
- इपिडिमियोलोजीकल, माॅलीक्यूलर विधियो द्वारा कुष्ठ रोग के प्रसार का अध्ययन
- कुष्ठ रोग के उपचार हेतु विकसित रेजीमिन पर ट्रायल करना, नये रेजीमिन का विकास करना, सर्जीकल विधियो का विकास एव आकलन, औषधि क्रिया एवम् काइनेटिक्स पर अध्ययन आदि
क्षयरोग एव अन्य माइकोबैक्टीरियल सक्रमण
- माॅलीक्यूलर एपिडिमियोलोजी: विभिन्न जीनोटाइपिक विधियो द्वारा क्षय रोग के फैलाव पर अध्ययन कार्य
- औषधि प्रतिरोधकता: माॅलीक्यूलर तकनीके, प्रोब्स, माइकोएरे आधारित कार्य
- उपचार के लिए वैक्सीन, नई हर्बल औषधियाॅ
- एनीमल अध्ययनः इम्यूनोमाॅड्यूलेशन, औषधियाॅ
एचआईवी/ड्स
- एचआईवी-क्षय रोग, एचआईवी एव कुष्ठ रोग मे सबध
- रोग के क्लीनीकल कोर्स पर अध्ययन
फाइलेरियासिस
- कुष्ठ रोग के साथ फाइलेरियासिसराइसिस के सबधो पर अध्ययन आदि
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